Shree B.N. Highschool - Chandod
Shree B.N. High School - Chandod - M.S.Patil

શ્રીમતી એમ.એસ.પાટીલ

ज्ञान का भंडार

क्या आप जानते हो चाँद के बारे मे ? नही । तो अब जान लो । चाँद का इतिहास ।
चाँद की ओर जितना हमारा ध्यान जाता है, उतना आकाश के और किसी पिंड की ओर नहीं जाता । चाँद रोज घटता – बढता है । उसका जितना हिस्सा रोज घटता या बढता है उतने हिस्से को एक ‘कला’ कहते है । चाँद हमारी पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है, परंतु वह इस तरह घूमता है कि हमेशा उसका एक ही रूख पृथ्वी की ओर रहता है । पृथ्वी के चारों ओर घूमते समय चाँद की चाल कभी तेज, कभी साधारण और कभी बहुत धीमी हो जाती है ।

चाँद में भी काले – काले धब्बे दिखाई देते है उसे दूरबीन का आविष्कार करनेवाले गेलीलियो ने समुन्दर समझा था, क्योंकि उसकी छोटी सी – दूरबीन से चाँद की सपाट सतह ही दिखाई देती थी ।
चाँद पृथ्वी से छोटा है । उसका घेरा पृथ्वी के घेरे के लगभग पचासवे भाग के बराबर है । उसके आरपार की लम्बाई २१६०२१६० मील है । यह लम्बाई पृथ्वी के आरपार की लम्बाई के चौधाइ से कुछ अधिक है । चाँद का वजन पृथ्वी के वजन के लगभग ८० वे भाग के बराबर है । उसकी आकर्षण शान्ति भी पृथ्वी के मुकाबले बहुत कम है ।
आदमी चाँद पर पहुँच भी जाय तो वह जिन्दा नहीं रह सकता, क्योंकि वहाँ साँस लेने तक के लिए हवा नही है । हवा न होने से वहाँ कुछ सुनाई भी न देगा । हवा की लहरही आवाज को हमारे कानों तक पहुँचाती है । चाँद पर पहुँचकर आदमी जिगर जिन्दा बच जाए तो हवा का दबाव न होने के कारण उसका वजन बहुत हलका फुलका रहेगा ।
चाँद का जन्मः- कहते है चाँद हमारी पृथ्वी का ही टूकडा है । अब से कोइ एक अरब साल पहले उसका जन्म हुआ था । तब पृथ्वी का आकार शकरकंद जैसा था और वह आपनी धुरी पर भयानक तेजी से धूमती हुई सूरज के चारों ओर चक्कर लगा रही थी । धीरे-धीरे सिकुडने लगी और नारंगी की जैसी बन गई । उसी जमाने मे उसके सिरे का एक भाग टूटकर अलग हो गया । मगर वह टूकडा नष्ट नहीं हुआ वह तो टुकडा चाँद है । जो पृथ्वी को आकर्षणशक्ति मे बँधा हुआ हर घडी पृथ्वी के चारों ओर घुमता है ।